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बसंत…

क्या लिखूँ बसंत मैं,

पत्थरों के जंगलों में,

वातानुकूलित कमरों में बैठा,

क्या लिखूँ बसंत मैं….

ना पत्तों को झड़ते देखा,

ना नवअंकुर लगते,

क्या लिखूँ बसंत मैं…

Photo by Timea Kadar on Pexels.com
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