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रिटायरमेंट..

सबको नही मिलती,
‘रिटायरमेंट’
हम रोज कुआं खोदते है,
रोज पानी पीते है…
इकट्ठा कर सके कल के लिए,
इतना मयस्सर ना हुआ,
अब तो अच्छा लगता है…
मेहनतकशीं भी एक लत होती है,
अब काम ना हो तो,
खुद को चिकोटी काट कर चेक करता हूँ,
मैं ठीक तो हूँ ना,
खुद से वादा जो किया था,
कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छत समाः।

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