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जरूरत हो, जिंदगी हो.. क्या हो तुम ?

सुनो !

तुम मेरी जिंदगी में,

नमक जैसी हो,

बिन तेरे

कोई स्वाद नही

किसी व्यंजन का

सब फीका

सा लगता है,

प्यार-व्यार

मुझे सामझ नही आता

मैं बस इतना जनता हूँ,

की तुम्हारे साथ

सब स्वादिस्ट लगता है,

बिन तेरे, सब फीका..

और हा जब जब

मैं व्रत रखता हूं ,

तब तब तुम

सेंधा नमक

बन जाती हो,

तुम ही कहो

मुझे तुमसे प्यार भी है या

तुम बस मेरी

जरूरत हो, जिंदगी हो.. क्या हो तुम ?

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