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हाय रे लत!

हाय रे लत!

आज घड़ी,घर छोड़ आया हूं,

ऐसा लग रहा,

शरीर का कोई हिस्सा छोड़ आया हूँ,

तुम पूछती हो ना,

तुम मेरे लिए क्या हो,

कुछ ऐसा ही महसूस होता है,

जब तुम नही होती,

तो क्या अब मैं तुम्हे लत कहूँ…

क्या कहूँ ?

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शतरंज की बाज़ी…

ये किस उधेड़बुन में उलझा रही हो मुझे,
कभी दो कदम आगे,
तो कभी ढाई कदम पीछे,
क्यो जीवन को ‘शतरंज की बाजी’
बना रही हो तुम,
चलो तुम जीती,मैं हार जाता हूँ,
तुम अपनी जिद वही रखो,
मैं अपना सर झुकाता हूँ,
कभी तो हाथ मे मेरी, तुम अपना हाथ भी दे दो,
कदम संग- संग बढ़ाओ,
थोड़ी दूरी साथ तो दे दो…
चलो कोई ऐसा चाल जिसमे,
तुम हारो ना मैं हारु..
चलो शतरंज की हम इक नई बाज़ी बनाते है..

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जरूरी है क्या?

प्रेम करना और बोलना,

जरूरी है क्या,
जब लोगो ने #प्रेम को,
बोलना शुरू किया,

प्रेम फीका होता चला गया,

वो क्या #प्रेम ,
जिसे जताना पड़े,
करता हूँ मैं तुमसे ,
बताना पड़े,

प्रेम तो बस चेहरे पे,

आंखों में , मुसकुराहट में,
व्यवहार में दिख ही जाता हैं..

प्रेम को दर्शाने की जरूरत नही पड़ती…

हमको पता होता है कि,
कौन हमसे #प्रेम करता है,
एक एहसास के सिवा,
और क्या है #प्रेम

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मैं प्रेम में हूँ…

सिर्फ सभ्यता और व्यवस्था के बंधन के कारण तुम्हारे साथ हूँ,

ऐसा नही है….

एक अनजाना सा लगाव है..

जो तुमसे दूर जाने ही नही देता..

तुम इसे प्रेम जैसा कुछ कहना चाहो,

तो मैं तुम्हे सभ्यता के बंधनों से,

मुक्त करता हूँ..

मैं प्रेम में हूँ…

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दोस्त हो तुम मेरी …

दोस्त हो तुम मेरी ,
परम्पराओ, व्यवस्थाओं और समाज ने,
तुम्हे मेरी पत्नी बना दिया….
पर सच कहूं?
पति पत्नी के रिश्तों की SOP
मुझे समझ नहीं आती…..
हर रिश्ते की भी अपनी SOP होती हैं( SOP – standard operating Procedures)
Do’s & Don’ts होते है..
इसीलिए मैं तुम्हे दोस्त कहता हूं..
दोस्ती के SOPs बड़े निराले है,

गिरोगी तो थाम लूंगा,
भटकोगी तो, राह दूंगा,
रूठोगी तो, मना लूंगा,

भरोषा खुद से ज्यादा यार
दूंगा तुम्हे,
अनकंडिशनल प्यार…
क्योकी मुझे पता है,
तुम “तुम” भी तो हो,
मैं “मैं” भी तो हु….

दोस्त हो तुम मेरी ……

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जरूरत हो, जिंदगी हो.. क्या हो तुम ?

सुनो !

तुम मेरी जिंदगी में,

नमक जैसी हो,

बिन तेरे

कोई स्वाद नही

किसी व्यंजन का

सब फीका

सा लगता है,

प्यार-व्यार

मुझे सामझ नही आता

मैं बस इतना जनता हूँ,

की तुम्हारे साथ

सब स्वादिस्ट लगता है,

बिन तेरे, सब फीका..

और हा जब जब

मैं व्रत रखता हूं ,

तब तब तुम

सेंधा नमक

बन जाती हो,

तुम ही कहो

मुझे तुमसे प्यार भी है या

तुम बस मेरी

जरूरत हो, जिंदगी हो.. क्या हो तुम ?

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ब्रेकअप…

बहुत प्यार करती थी,

वो मुझसे,

वो रोज दिन में 2-3 बार मेरे मुह लगती,

महफिले जमती,

मैं भी उसे मुह लगाकर,

बड़ा शान बघारता,

पर मैं उससे कभी वो प्यार नही कर पाया,

और धीरे धीरे सिगरेट ने मुझको छोड़ दिया..

आज एक महीने हो गए अपने ब्रेकअप को……

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