लिखूंगा प्रेम भी …

लिखूंगा प्रेम भी लिखूंगा,पहले इन बहती आँखों के,आंसू तो लिख लूँ….जिस ओर देखता हूँ मुझको,बहती आंखे दिख जाती है,चीखें, आहें, रूदन, सिसकी,अब मानवता शर्माती है…

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