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आज़ादी…

पतंग को डोर से आज़ादी,

जंगल को मोर से,

पुलिस को चोर से,

रात को भोर से आज़ादी…

नाती को नानी से,

मछली को पानी से,

व्यापारी को हानि से,

अनपढ़ को ज्ञानी से,

राजा को रानी से आज़ादी…

कर्तव्यों से आज़ादी,

जिम्मेदारी से आज़ादी,

अनुशासन से आज़ादी,

प्रशासन से आज़ादी,

काम काज से आज़ादी,

राष्ट्रवाद से आज़ादी…

ये आज़ादी नही कामचोरी है,

ये चोरी फिर छिनाजोरी है…

Photo by Tirachard Kumtanom on Pexels.com
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