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प्रेम/Love

प्रेम करना,

और बोलना,

जरूरी है क्या,
जब लोगो ने #प्रेम को,
बोलना शुरू किया,

प्रेम फीका होता चला गया,

वो क्या #प्रेम ,
जिसे जताना पड़े,
करता हूँ मैं तुमसे ,
बताना पड़े,

प्रेम तो बस चेहरे पे,

आंखों में , मुसकुराहट में,
व्यवहार में दिख ही जाता हैं..

प्रेम को दर्शाने की जरूरत नही पड़ती ,

हमको पता होता है कि,
कौन हमसे #प्रेम करता है,
एक एहसास के सिवा,
और क्या है #प्रेम

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तुमको ना भूल पाएंगे/Irfan Khan

अक्सर वो जल्दी छोड़ जाते हैं जिनकी जरूरत ज्यादा होती है। बहुत से लोगो ने अलग – अलग क्षेत्रों में बहुत ही कम उम्र में शिखर को पाया और दुनियां छोड़ गए। ये लिस्ट बहुत लंबी है इसमें राजनेता से लेकर अभिनेता, लेखक – लेखिका, दार्शनिक, वैज्ञानिक, समाज सुधारक और भी अनेकों क्षेत्र से सम्बंधित महापुरुष।

जिनको दुनियां कभी भूल नहीं पाएंगी, उन्होंने जितना भी जिया लुटाते रहे,उन्हें जो कुछ भी मिला।

ऐसा लगता है की ऊपरवाला भी अपने आस पास ऐसे ही लोगो को चाहता है। इरफ़ान को देखते हुए बड़ा हुआ हूं मैं , के फिल्में सिर्फ इसलिए देखी की चलो कुछ नही तो इरफ़ान को देख लेंगे।

आज जब समाचार सुना उनके असमय चले जाने का तो दो मिनट के लिए ख़ामोश हो गया और ज़ुबान से अपने आप ही बोल उठा – तुमको ना भूल पाएंगे।।

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Thought of the moment – 6

सबकुछ नही बोला जा सकता,ना ही लिखा जा सकता है… वही जो आप बोल और लिख नही पाते वही खोज है…प्रेम,ईश्वर,आत्मा,लक्ष्य जो कहना कह लो पर यही है जो बोला नही जा सकता..

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Thought of the moment – 5

मैं कभी इतना बड़ा नही बनना चाहूंगा कि मेरे समर्थक एक और नया धर्म बना ले, पंथ बना ले..

ये जितने धर्म ,पंथ आपको दिखते है इनके जन्मदाता कोई महान व्यक्ति ही था..

जाने अनजाने बाँट गया मानवता को..

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एक सौ एक रुपये का दहेज…

मेरे लाख मना करने पर भी,
एक सौ एक रुपये का दहेज,
देकर प्रथा का मान रखा गया….
समय के साथ प्रथाएं,
रीतियां,नियम ,कानून,
बदलते रहना चाहिए,
कोई नियम या कोई प्रथा,
आखिरी या सर्वोच्च नही हो सकती,
बेहतर और बेहतर,
की संभावनाएं बनी रहती है,
और इन्हें बदलने की,
परिष्कृत करने की जिम्मेदारी,
कोई बूढ़ा समाज कभी नही ले सकता,
क्योंकि बदलाव,जवानी का दूसरा नाम है..

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पर्ची..

सुनों!
आज ये पर्ची मिली ,
किताब के पन्नों के बीच पड़ी हुई थी,
कोई चार पांच साल पुरानी होगी,
जब से तुम गयी हो,
पर्चियां बनाना बंद कर दिया है मैंने,
अब अक्सर किचेन में,
कुछ ना कुछ कम ही रहता है,
और खाने में भी..
अब जब आओगी,
तो अपनी पर्ची तैयार रखना,
बहुत मिस करता हूँ,
पर्ची को,
देखो पर्ची को मिस करते करते,
कैसे तुमको भी मिस करने लगा हूँ।

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इंसान जो हो..

कैसे खुश होंगे तुम,
इंसान जो हो..
तुम्हे तो आदत है ना,
जो नही है वो मांगने की,
जो है उसमें तुम कब खुश हुए,
जो मिलता है वो तुम्हे चाहिए नही,
जो मिला नही उसके लिए तुम ,
जान लगा दोगे..
धन्य हो तुम, हे मानव!

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वीर रस कब गाओगे तुम…

वीर रस कब गाओगे तुम,

कब तक इश्क़ लड़ाओगे तुम,

दुश्मन देश के अंदर भी हैं,

कैसे देश बचाओगे तुम,

वीर रस कब गाओगे तुम….

बहुत हो गया प्यार मुहब्बत,

कब तक होश में आओगे तुम,

बात – चीत विचार सम्मेलन,

कब तलवार उठाओगे तुम..

वीर रस कब गाओगे तुम ..

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Thought of the moment – 3

मुबंई,अहमदाबाद, सूरत एयर हैदराबाद में लोगो की भीड़ अपने घरों को जाने के लिए अपने जान से खेल रही है। आलम ये है कि घर जा नही सकते और मुसीबतें वहां भी कुछ कम नही।

सोचिए जो लोग रोज कमाते थे तब उन्हें दो वक्त की रोटी नसीब होती थी,आज 20 दिन से बेकार बैठे है, ठेकेदार पैसे दे रहे या नही ये हम सब जानते ही है। सरकारें सब तक कब पहुचीं हैं।

सर्वशक्तिमान इंसान आज असहाय और निर्बल सा प्रतीत हो रहा है। कहाँ गए सारे सपनें, लक्ष्य, परिभाषाएं, मापदंड। याद रखे हम जब जब भूल जाते है प्रकृति हमे याद दिलाने के लिए कुछ ऐसा रचती है कि हे दम्भी, सो कॉल्ड सर्वशक्तिमान मानव मेरी नजर में तुम एक जीव मात्र हो, अपनी औकात में रहो, जिओ और जीने दो।।

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मंजिल की नाराजगी…

तुम चलना भी नहीं चाहते,

और कहीं पहुंचना भी चाहते हो,

 बस यही बात मंजिल को नाराज करती है

 तुम कहीं पहुंच नहीं रहे,

 इसका मतलब तुम चल नहीं रहे

उस तरफ उधर,

जिधर तुम्हें पहुंचना है……

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पड़ाव..

जाना तो है कही,

पहुच भी जायेंगे,

पर क्या पता,

वो मंजिल होगी,

या फिर वही….

पड़ाव…

पड़ाव तो बस,

ठहराव है,

जब लगता है ,

मंजिल है,

पहुचने पे फिर,

वही ठहराव,

पड़ाव…..

और फिर सफर to be continued…..

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