मैं प्रेम में हूँ…

सिर्फ सभ्यता और व्यवस्था के बंधन के कारण तुम्हारे साथ हूँ,
ऐसा नही है….
एक अनजाना सा लगाव है..
जो तुमसे दूर जाने ही नही देता..
तुम इसे प्रेम जैसा कुछ कहना चाहो,
तो मैं तुम्हे सभ्यता के बंधनों से,
मुक्त करता हूँ..
मैं प्रेम में हूँ…

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माँ

कुछ रिश्तों पे,कुछ भी लिख लेता हूँ,तुम पर लिखनाजैसे पूरी एक दुनियां लिखनी हो,छोड़ देता हूँ,तुमको लिखता नही,जीता हूँ,तुम जीवन हो,माँ…

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अपने…

अपने वे नही जो, रोने के बाद आते हैं,अपने वे होते हैं ,जो रोने नही देते । दोस्त वो नही जो गिरने के बाद आते

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प्रेम/Love

प्रेम करना, और बोलना, जरूरी है क्या,जब लोगो ने #प्रेम को,बोलना शुरू किया, प्रेम फीका होता चला गया, वो क्या #प्रेम ,जिसे जताना पड़े,करता हूँ

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Thought of the moment – 6

सबकुछ नही बोला जा सकता,ना ही लिखा जा सकता है… वही जो आप बोल और लिख नही पाते वही खोज है…प्रेम,ईश्वर,आत्मा,लक्ष्य जो कहना कह लो

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पर्ची..

सुनों!आज ये पर्ची मिली ,किताब के पन्नों के बीच पड़ी हुई थी,कोई चार पांच साल पुरानी होगी,जब से तुम गयी हो,पर्चियां बनाना बंद कर दिया

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