सुनो सिकन्दर …!

सुनो ! सिकंदर, वापस आना मत भूलना, जितना-हारना, आगे बढ़ना, थक जाओ गर कभी, तुम हार जाओ गर कभी, लौट आना, यहाँ तुम्हारा सदैव, स्वागत है, ये घर है तुम्हारा… इसलिए वापस आना मत भूलना… 

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मैं जानता हूं तुम्हे…

तुम कह सकती हो,तुम क्या समझोगे,पर मैं तुम्हे समझता हूं,मैं तब से तुम्हे,समझता हूं,जब मैं “मैं” बन रहा था…बल्कि मैंने,दुनिया को,तुमको,सबको,सिर्फ तुम्हारी,नजर से,देखा,जाना,समझा,उन नौ महीनों

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उपहार / Women’s day

ये मेरी कविता मेरी सभी महिला मित्रो को सपर्पित ….💐💐💐 मैंने कहा –सोच रहा हु,इस विमेंस डे पे क्या दू तुम्हे,हार दू,उपहार दूबंगला दू या

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गंगा..

नदी,सभ्यता,सौंदर्य,प्यास,जलाशय,माँ,पापदायिनी,मोक्षदायिनी,जीवनदायिनी,पहला प्यार,मेरी कविताये,चाय की चुस्की,नौका विहार,पुरखो का अस्थिविसर्जन,मुंडन,आरती,सुबहे बनारस,हम बनारसियों के लिए,जीवन गंगा है,और ‘गंगा’ जीवन ….हर हर गंगे.. भृगुऋषी

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काम..

काम कोई अच्छा बुरा, सही गलत नही होता, अच्छा काम होता है, या बुरा काम होता है.. आप अच्छे बुरे नही होते, आप अपना काम

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