ख़्वाब देखा करो..

मैंने पूछा,थकते नही तुम?ना दिन देखते हो,ना रात,ना ही तुम ऊबते हो,ना शिकायत करते हो,एक समय मे इतने काम,ऊफ़,क्या राज है तुम्हारी ज़िंदादिली का…? उसने

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रिटायरमेंट..

सबको नही मिलती,‘रिटायरमेंट’हम रोज कुआं खोदते है,रोज पानी पीते है…इकट्ठा कर सके कल के लिए,इतना मयस्सर ना हुआ,अब तो अच्छा लगता है…मेहनतकशीं भी एक लत

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