जवानी…

जवानी बदली में निकली हुई धूप है,
जवानी आंधी से लड़ता हुआ दीया है,
जवानी पत्थरों को तोड़ती दी हुई नदी है,
जवानी जुल्म आगे तना हुआ सर है…

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रोटी की भाषा…

घर पे अच्छा लगता है,सैलरी तो आनी ही है,रेसोल्यूशन, मोटिवेशन,सब चल रहा है,तीनो टाइम खाना,तीन बार चाय कॉफी,छाती चौड़ाकर कहना,लॉक डाउन जरूरी है….कल पास वाली

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पिता का कंधा…

ये बेफिक्री सिर्फ,इसी कंधे पर थी,बाकी दुनियाबड़ी कठिन है,इस कंधे पे,कोई फिक्र नही,डर नही,कोई शर्म नही,कोई झिझक नही,ये सिर्फ कंधा नही ,पुरी दुनिया है इसकी,क्योकि

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