हाँ मैंने देखा है…

हाँ रहता है मुझमें कही वो,

मिलता भी है मुझसे रोज,

सिरहाने पड़ी किताबों के पन्नों में,

कभी दीवारों में दिखता है ,

उसका चेहरा,

कभी मेरी आँखों में

खुद ब खुद उभर आता है वो,

जब मैं एकांत में ,

सुन रहा होता हु,

रफी और मुकेश को,

कौन कहता है,

परमेश्वर को किसी ने नहीं देखा,

हाँ मैंने देखा है,

महसूस किया है,

इधर- उधर ,

अपने आस पास कही ….

8 thoughts on “हाँ मैंने देखा है…

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