जरूरत हो, जिंदगी हो.. क्या हो तुम ?

सुनो !

तुम मेरी जिंदगी में,

नमक जैसी हो,

बिन तेरे

कोई स्वाद नही

किसी व्यंजन का

सब फीका

सा लगता है,

प्यार-व्यार

मुझे सामझ नही आता

मैं बस इतना जनता हूँ,

की तुम्हारे साथ

सब स्वादिस्ट लगता है,

बिन तेरे, सब फीका..

और हा जब जब

मैं व्रत रखता हूं ,

तब तब तुम

सेंधा नमक

बन जाती हो,

तुम ही कहो

मुझे तुमसे प्यार भी है या

तुम बस मेरी

जरूरत हो, जिंदगी हो.. क्या हो तुम ?

2 thoughts on “जरूरत हो, जिंदगी हो.. क्या हो तुम ?

Add yours

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

A WordPress.com Website.

Up ↑