गंगा..

नदी,सभ्यता,सौंदर्य,प्यास,जलाशय,माँ,पापदायिनी,मोक्षदायिनी,जीवनदायिनी,पहला प्यार,मेरी कविताये,चाय की चुस्की,नौका विहार,पुरखो का अस्थिविसर्जन,मुंडन,आरती,सुबहे बनारस,हम बनारसियों के लिए,जीवन गंगा है,और ‘गंगा’ जीवन ….हर हर गंगे.. भृगुऋषी

Continue reading

Rate this: