आंखें..

पहले मैं सुन लेता था आंखों को,अब आंखों ने बातें करना छोड़ दिया… लड़ती थी, शरमाती थी झुक जाती थी,अब आंखों ने झुकना लजाना छोड़ दिया।

प्यास का मंज़र ये है अब,या तो समंदर चाहिए या कुछ भी नही… शुभ रात्रि💐

जिंदगी ऐसी भी होती है…

जिंदगी ऐसी भी होती है,वैसी भी होती है,जितनें लोगजितनें पलजितनी जगहें,जितनी सोच,जितना नज़रियाजितने सपनें,जितनी सफलता,जितनी हार,जितनी नफरतें,जितना प्यार,जितनी गरीबीजितना अत्याचार,जितनी अव्यवस्था,जितनी सरकार, ये जितने , जितने हैजिंदगी उस हरजगह है….उतने रंग है जिंदगी के….सब जी लो,बिना शिकवाबिना शिकायत..

मैं कुछ कहना चाहता हूँ..

हम कुछ भी नहीं,जो हैं, जैसे हैं, जहाँ हैं,सबकी वजहवह एक शख्स हैं,जिसे हम पापा कहते हैं,जिसने हमे बनाने मेंखुद के सपनेइच्छाये,ऐसो आराम,सब एक तरफरख दिए। शब्दों की कमी पड़ जाती हैजब मैं कुछ लिखना, बोलना चाहता हूँ, बस यही कहकर विराम देता हूँ…

शहर का वो कोना…

हर शहर में वो एक कोना होता है जो बिल्कुल शांत,निर्जन और एडवेंचरस होता है, ऐसे कोने ढूंढना अच्छा लगता है मुझे।करनाल में ऐसे कई कोने है,ये एक ऐसा शहर है जिसे मैंने पैदल और सायकिल से एक्सप्लोर किया है।ऐसे ही किसी जगह पे बैठा लिख रहा हूँ, पीछे की तरफ नहर है जो अभी... Continue Reading →

अशीर्षक…

क्या उम्मीदें थी उसे ज़िंदगी से?क्या प्यास थी?क्या नही था उसके पास?रंग,रूप,सेहत,दौलत...शख्शियतये कौन सी टीस है,जो आत्महत्या तक ले जाती है?वो कौन सी वजह है,कितनी कीमती है,की जिसके लिए जान दी जा सके..?स्तब्ध... प्रश्नसूचक वाक्यों से घिर गया हूँ मैं सुशांत...मिला तुम्हें जिसकी तलाश में तुमने,लोक बदल दिए।

निःशुल्क…

जो निःशुल्क है,वही सबसे ज्यादा कीमती है..नींद , शांति , आनन्द,हवा ,पानी , प्रकाशऔर सबसे ज्यादा हमारी सांसे.. 🍁

यादों का कारवां..

मैं इक चलता - फिरता कारवां हूँ,यादों का,और कुछ भी तो नही मेरे पास,यादों के सिवा,हर पड़ाव से आगे निकल जाता हूँ,हर बार खाली होते हैं मेरे हाथ,कुछ भी तो सँजो नही पाया,पूंजी के नाम पर,बस यादें..कुछ ठहाकों भरी,कुछ आहें..कुछ छूटी मन्ज़िले,कुछ बिसरी राहें,यादों का कारवां ही तो हूँ मैं..हमेशा रहूँगा तुम्हारी यादों में,कभी आंसू... Continue Reading →

मैं प्रेम में हूँ…

सिर्फ सभ्यता और व्यवस्था के बंधन के कारण तुम्हारे साथ हूँ, ऐसा नही है.... एक अनजाना सा लगाव है.. जो तुमसे दूर जाने ही नही देता.. तुम इसे प्रेम जैसा कुछ कहना चाहो, तो मैं तुम्हे सभ्यता के बंधनों से, मुक्त करता हूँ.. मैं प्रेम में हूँ...

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